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महाभारत 82.108

तत्रोदपानो धर्मज्ञ सर्वपापप्रमोचनः
समुद्रास्तत्र चत्वारः कूपे संनिहिताः सदा
तत्रोपस्पृश्य राजेन्द्र न दुर्गतिमवाप्नुयात्

पूरा अध्याय