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महाभारत 81.52

पूतात्मानश्च राजेन्द्र प्रयान्ति परमां गतिम्
दशाश्वमेधिकं चैव तस्मिंस्तीर्थे महीपते
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र गच्छेत परमां गतिम्

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