ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 8181.34महाभारत 81.34वंशमूलकमासाद्य तीर्थसेवी कुरूद्वह स्ववंशमुद्धरेद्राजन्स्नात्वा वै वंशमूलकेपिछलाअगलापूरा अध्याय