ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 8181.125महाभारत 81.125पुण्यमाहुः कुरुक्षेत्रं कुरुक्षेत्रात्सरस्वतीम् सरस्वत्याश्च तीर्थानि तीर्थेभ्यश्च पृथूदकम्पिछलाअगलापूरा अध्याय