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महाभारत 77.29

प्रस्थाप्य पुष्करं राजा वित्तवन्तमनामयम्
प्रविवेश पुरं श्रीमानत्यर्थमुपशोभितम्
प्रविश्य सान्त्वयामास पौरांश्च निषधाधिपः

पूरा अध्याय