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महाभारत 75.27

सैवं समेत्य व्यपनीततन्द्री; शान्तज्वरा हर्षविवृद्धसत्त्वा
रराज भैमी समवाप्तकामा; शीतांशुना रात्रिरिवोदितेन

पूरा अध्याय