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महाभारत 69.16

ऋतुपर्ण उवाच
त्वमेव हयतत्त्वज्ञः कुशलश्चासि बाहुक
यान्मन्यसे समर्थांस्त्वं क्षिप्रं तानेव योजय

पूरा अध्याय