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महाभारत 65.26

बृहदश्व उवाच
एवं विमृश्य विविधैः कारणैर्लक्षणैश्च ताम्
उपगम्य ततो भैमीं सुदेवो ब्राह्मणोऽब्रवीत्

पूरा अध्याय