ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 6161.27महाभारत 61.27कं नु पृच्छामि दुःखार्ता त्वदर्थे शोककर्शिता कच्चिद्दृष्टस्त्वयारण्ये संगत्येह नलो नृपःपिछलाअगलापूरा अध्याय