ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 6161.23महाभारत 61.23यूथभ्रष्टामिवैकां मां हरिणीं पृथुलोचन न मानयसि मानार्ह रुदतीमरिकर्शनपिछलाअगलापूरा अध्याय