ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 6161.20महाभारत 61.20न मे त्वदन्या सुभगे प्रिया इत्यब्रवीस्तदा तामृतां कुरु कल्याण पुरोक्तां भारतीं नृपपिछलाअगलापूरा अध्याय