ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 5757.1महाभारत 57.1बृहदश्व उवाच दमयन्ती ततो दृष्ट्वा पुण्यश्लोकं नराधिपम् उन्मत्तवदनुन्मत्ता देवने गतचेतसम्अगलापूरा अध्याय