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महाभारत 49.37

वैशंपायन उवाच
अथैनमब्रवीद्राजा ब्रवीतु भगवानिति
इमामवस्थां संप्राप्तं श्रोतुमिच्छामि पार्थिवम्

पूरा अध्याय