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महाभारत 42.22

अक्षया तव कीर्तिश्च लोके स्थास्यति फल्गुन
त्वया साक्षान्महादेवस्तोषितो हि महामृधे
लघ्वी वसुमती चापि कर्तव्या विष्णुना सह

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