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महाभारत 39.30

वैशंपायन उवाच
ते श्रुत्व शर्ववचनमृषयः सत्यवादिनः
प्रहृष्टमनसो जग्मुर्यथास्वं पुनराश्रमान्

पूरा अध्याय