ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 3838.23महाभारत 38.23नैव नः पार्थ भोगेषु न धने नोत जीविते तुष्टिर्बुद्धिर्भवित्री वा त्वयि दीर्घप्रवासिनिपिछलाअगलापूरा अध्याय