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महाभारत 297.66

युधिष्ठिर उवाच
श्यामो य एष रक्ताक्षो बृहच्छाल इवोद्गतः
व्यूढोरस्को महाबाहुर्नकुलो यक्ष जीवतु

पूरा अध्याय