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महाभारत 281.95

ततोऽब्रवीत्तथा दृष्ट्वा भर्तारं शोककर्शितम्
प्रमृज्याश्रूणि नेत्राभ्यां सावित्री धर्मचारिणी

पूरा अध्याय