Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 281.65

विश्रान्तोऽसि महाभाग विनिद्रश्च नृपात्मज
यदि शक्यं समुत्तिष्ठ विगाढां पश्य शर्वरीम्

पूरा अध्याय