Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 278.26

दीर्घायुरथ वाल्पायुः सगुणो निर्गुणोऽपि वा
सकृद्वृतो मया भर्ता न द्वितीयं वृणोम्यहम्

पूरा अध्याय