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महाभारत 278.21

अश्वपतिरुवाच
गुणैरुपेतं सर्वैस्तं भगवन्प्रब्रवीषि मे
दोषानप्यस्य मे ब्रूहि यदि सन्तीह केचन

पूरा अध्याय