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महाभारत 276.13

वैशंपायन उवाच
एवमाश्वासितो राजा मार्कण्डेयेन धीमता
त्यक्त्वा दुःखमदीनात्मा पुनरेवेदमब्रवीत्

पूरा अध्याय