Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 275.67

अभ्यर्च्य विविधै रत्नैः प्रीतियुक्तौ मुदा युतौ
समाधायेतिकर्तव्यं दुःखेन विससर्ज ह

पूरा अध्याय