Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 270.4

पतन्त्या स तया वेगाद्राक्षसोऽशनिनादया
हृतोत्तमाङ्गो ददृशे वातरुग्ण इव द्रुमः

पूरा अध्याय