Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 262.32

अवमन्य स तत्सर्वं स्वरूपं प्रतिपद्य च
सान्त्वयामास वैदेहीमिति राक्षसपुंगवः

पूरा अध्याय