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महाभारत 262.1

मार्कण्डेय उवाच
मारीचस्त्वथ संभ्रान्तो दृष्ट्वा रावणमागतम्
पूजयामास सत्कारैः फलमूलादिभिस्तथा

पूरा अध्याय