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महाभारत 255.44

वैशंपायन उवाच
तच्छ्रुत्वा द्रौपदी भीममुवाच व्याकुलेन्द्रिया
कुपिता ह्रीमती प्राज्ञा पती भीमार्जुनावुभौ

पूरा अध्याय