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महाभारत 253.15

अथाब्रवीच्चारुमुखं प्रमृज्य; धात्रेयिका सारथिमिन्द्रसेनम्
जयद्रथेनापहृता प्रमथ्य; पञ्चेन्द्रकल्पान्परिभूय कृष्णा

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