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महाभारत 247.43

ध्यानयोगाद्बलं लब्ध्वा प्राप्य चर्द्धिमनुत्तमाम्
जगाम शाश्वतीं सिद्धिं परां निर्वाणलक्षणाम्

पूरा अध्याय