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महाभारत 225.31

निशम्य तद्वचनं पार्थिवस्य; दुर्योधनो रहिते सौबलश्च
अबोधयत्कर्णमुपेत्य सर्वं; स चाप्यहृष्टोऽभवदल्पचेताः

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