ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 221221.45महाभारत 221.45तेषां देहान्विनिर्भिद्य शरास्ते निशितास्तदा निष्पतन्तो अदृश्यन्त नगेभ्य इव पन्नगाःपिछलाअगलापूरा अध्याय