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महाभारत 220.7

मार्कण्डेय उवाच
एवमुक्ता ततः स्वाहा तुष्टा स्कन्देन पूजिता
पावकेन समायुक्ता भर्त्रा स्कन्दमपूजयत्

पूरा अध्याय