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महाभारत 219.13

स्कन्द उवाच
एवमस्तु नमस्तेऽस्तु पुत्रस्नेहात्प्रशाधि माम्
स्नुषया पूज्यमाना वै देवि वत्स्यसि नित्यदा

पूरा अध्याय