ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 218218.44महाभारत 218.44स्कन्दं चोवाच बलभिदियं कन्या सुरोत्तम अजाते त्वयि निर्दिष्टा तव पत्नी स्वयंभुवापिछलाअगलापूरा अध्याय