ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 215215.21महाभारत 215.21सर्वासां या तु मातॄणां नारी क्रोधसमुद्भवा धात्री सा पुत्रवत्स्कन्दं शूलहस्ताभ्यरक्षतपिछलाअगलापूरा अध्याय