Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 213.19

सा हृता तेन भगवन्मुक्ताहं त्वद्बलेन तु
त्वया देवेन्द्र निर्दिष्टं पतिमिच्छामि दुर्जयम्

पूरा अध्याय