Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 212.10

भक्ष्या वै विविधैर्भावैर्भविष्यथ शरीरिणाम्
अथर्वाणं तथा चापि हव्यवाहोऽब्रवीद्वचः

पूरा अध्याय