ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 209209.16महाभारत 209.16यस्तु विश्वस्य जगतो बुद्धिमाक्रम्य तिष्ठति तं प्राहुरध्यात्मविदो विश्वजिन्नाम पावकम्पिछलाअगलापूरा अध्याय