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महाभारत 204.1

मार्कण्डेय उवाच
एवं संकथिते कृत्स्ने मोक्षधर्मे युधिष्ठिर
दृढं प्रीतमना विप्रो धर्मव्याधमुवाच ह

पूरा अध्याय