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महाभारत 197.44

मार्कण्डेय उवाच
तया विसृष्टो निर्गम्य स्वमेव भवनं ययौ
विनिन्दन्स द्विजोऽऽत्मानं कौशिको नरसत्तम

पूरा अध्याय