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महाभारत 197.23

स्त्र्युवाच
नावजानाम्यहं विप्रान्देवैस्तुल्यान्मनस्विनः
अपराधमिमं विप्र क्षन्तुमर्हसि मेऽनघ

पूरा अध्याय