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महाभारत 194.29

मार्कण्डेय उवाच
विचिन्त्य त्वथ गोविन्दो नापश्यद्यदनावृतम्
अवकाशं पृथिव्यां वा दिवि वा मधुसूदनः

पूरा अध्याय