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महाभारत 192.24

यदि मे भगवान्प्रीतः पुण्डरीकनिभेक्षणः
धर्मे सत्ये दमे चैव बुद्धिर्भवतु मे सदा
अभ्यासश्च भवेद्भक्त्या त्वयि नित्यं महेश्वर

पूरा अध्याय