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महाभारत 192.1

वैशंपायन उवाच
युधिष्ठिरो धर्मराजः पप्रच्छ भरतर्षभ
मार्कण्डेयं तपोवृद्धं दीर्घायुषमकल्मषम्

पूरा अध्याय