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महाभारत 186.108

गन्धर्वाप्सरसो यक्षानृषींश्चैव महीपते
दैत्यदानवसंघांश्च कालेयांश्च नराधिप
सिंहिकातनयांश्चापि ये चान्ये सुरशत्रवः

पूरा अध्याय