Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 183.5

तत आदाय विप्रर्षे प्रतिगृह्य धनं बहु
भृत्यान्सुतान्संविभज्य ततो व्रज यथेप्सितम्
एष वै परमो धर्मो धर्मविद्भिरुदाहृतः

पूरा अध्याय