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महाभारत 180.13

कृष्णस्तु पार्थेन समेत्य विद्वा;न्धनंजयेनासुरतर्जनेन
बभौ यथा भूतपतिर्महात्मा; समेत्य साक्षाद्भगवान्गुहेन

पूरा अध्याय