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महाभारत 173.19

समाप्तकर्मा सहितः सुहृद्भि;र्जित्वा सपत्नान्प्रतिलभ्य राज्यम्
शैलेन्द्र भूयस्तपसे धृतात्मा; द्रष्टा तवास्मीति मतिं चकार

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