ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 1717.20महाभारत 17.20तया त्वभिहतो राजन्वेगवानपतद्भुवि वातरुग्ण इव क्षुण्णो जीर्णमूलो वनस्पतिःपिछलाअगलापूरा अध्याय