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महाभारत 156.1

वैशंपायन उवाच
युधिष्ठिरस्तमासाद्य तपसा दग्धकिल्बिषम्
अभ्यवादयत प्रीतः शिरसा नाम कीर्तयन्

पूरा अध्याय